रामबाबु यादव , गजल ।
मित्रताके हाथ कनिक, नरम हेबाक चाहिँ
आपतिमे हाथ कनिक, गरम हेबाक चाहिँ
शुभकामना

HATIDHA COTTAGE & RESORT LAHAN-15,HATIDHA SIRAHA

पापी मन मात्र पाप, सोंचिते रहिजायत छै
पापियोमे कहियो काल, धरम हेबाक चाहिँ
असल मित्रकें मात्र गपेटा नै, व्यबहार आ
दु:खमे सहयोगी सन , करम हेबाक चाहिँ
दु गो आत्माकें मित्रतामे,भरत सन भाइ आ
प्रभु ! रामचन्द्र जेहन , चरण हेबाक चाहिँ
राम केइ हाथ अछि अगा, मित्रता लेल
बस अहाँमें नै कनिको ,भरम हेबाक चाहिँ















