शिव मारुती ज्वेलर्स

रामबाबु यादव , गजल ।

मित्रताके हाथ कनिक, नरम हेबाक चाहिँ
आपतिमे हाथ कनिक, गरम हेबाक चाहिँ

शुभकामना

पापी मन मात्र पाप, सोंचिते रहिजायत छै
पापियोमे कहियो काल, धरम हेबाक चाहिँ

असल मित्रकें मात्र गपेटा नै, व्यबहार आ
दु:खमे सहयोगी सन , करम हेबाक चाहिँ

दु गो आत्माकें मित्रतामे,भरत सन भाइ आ
प्रभु ! रामचन्द्र जेहन , चरण हेबाक चाहिँ

राम केइ हाथ अछि अगा, मित्रता लेल
बस अहाँमें नै कनिको ,भरम हेबाक चाहिँ

२०७९ कार्तिक ४, शुक्रबार ०८:३७

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